इदरीस हसन लतीफ (Idris Hasan Latif) 1941 में रॉयल इंडियन एयर फोर्स का हिस्सा बनने वाले देश के पहले मुस्लिम वायु सेना प्रमुख थे और बाद में स्वतंत्रता के बाद भारतीय वायु सेना के प्रमुख बने। इतना ही नहीं बल्कि पाकिस्तान ने उन्हें अपनी वायु सेना के लिए भी पेशकश की, लेकिन इदरीस हसन ने उसे ठुकरा दिया। एयर चीफ मार्शल के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद, इदरीस हसन लतीफ महाराष्ट्र के राज्यपाल और फ्रांस में भारत के राजदूत भी बने। इदरीस हसन को भी आज वायु सेना दिवस के अवसर पर याद किया जा रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि विभाजन से पहले, लतीफ और उसके दोस्त जो पाकिस्तान गए थे, मलिक नूर और असगर खान ने भारत में कई लड़ाईयां लड़ीं, दूसरे विश्व युद्ध में भी एक साथ लड़े।
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पाकिस्तान वायु सेना प्रमुख बनने का ऑफर ठुकरा कर हिंदुस्तान को चुना
विभाजन के समय लतीफ भारत में ही रहे और उसके दोस्त मलिक नूर और असगर खान पाकिस्तान चले गए। वे पाक सेना के प्रमुख भी बने। वायु सेना से सेवानिवृत्त एयर कमोडोर, एफएम खान कहते हैं, जब उनके दोस्त पाकिस्तान में उच्च पदों पर बैठे थे।
तो उन्होंने लतीफ साहब को भी प्रस्ताव दिया कि यदि आप पाकिस्तान के वायु सेना में शामिल होते हैं, तो आपको वायु सेना प्रमुख बनाया जाएगा। लेकिन लतीफ़ साहब ने यह कहते हुए इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया कि मैं अपनी सेना का एक सिपाही बना रहना चाहता हूँ।
1971 की जंग में तीनों दोस्त आमने-सामने थे
लेकिन 24 साल बाद 1971 की लड़ाई में तीनों दोस्त आमने-सामने थे। और इस लड़ाई में पाकिस्तान को आत्मसमर्पण करना पड़ा। उस समय इदरीश सहायक वायु सेना प्रमुख के पद पर थे। मिग-23 और बाद में मिग-25 को भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
2018 में 94 साल की उम्र में हुआ था निधन
इदरीस हसन लतीफ का जन्म जून 1923 में हैदराबाद में हुआ था। 1 मई 2018 को उनकी मृत्यु पिछले वर्ष 94 वर्ष की आयु में हुई। इदरीश 1981 में वायु सेना से सेवानिवृत्त हुए। इदरीश देश के 10 वें वायु सेना प्रमुख बने थे।


