संगठन की जड़ें देश के 24 राज्यों तक
कहा जा रहा है कि इस संगठन की जड़ें देश के 24 राज्यों में फैली हुई हैं। कहीं इसके सदस्य अधिक सक्रिय हैं और कहीं कम हैं। लेकिन मुस्लिम बहुल इलाकों में उनकी जड़ें बहुत गहरी हैं। संगठन खुद को न्याय, स्वतंत्रता और सुरक्षा का हिमायती बताता है और समय-समय पर मुसलमानों के अलावा पूरे देश में दलितों, आदिवासियों पर अत्याचार के लिए खुलकर आवाज उठाता है।
सिमी की B-Wing कहा जाता है पीआईएफ को
PFI का विवादों से पुराना नाता है। इसे स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी का बी विंग कहा जाता है। सिमी जो 1977 में बनी थी, 2006 में प्रतिबंधित कर दी गई थी। इसके बाद, यह माना जाता है कि इस संगठन का गठन मुस्लिमों, आदिवासियों और दलितों को सशक्त बनाने के नाम पर किया गया था।
यह माना जाता है कि पीएफआई फ़ंक्शन सिमी के समान था। वर्ष 2012 में इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इस साल के अंत में, यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। इसके लिए गृह मंत्रालय को पत्र भी लिखा गया है लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिली है।
इस संगठन के कार्यकर्ताओं का नाम लव जिहाद, दंगे भड़काने, शांति को प्रभावित करने के मामले में बहुत पहले आया है। माना जाता है कि संगठन कई अलग-अलग संगठनों के साथ एक आतंकवादी संगठन है।
केरल सरकार अदालत में इस सगंठन का समर्थन कर चुकी है
ज्ञात हो कि केरल सरकार ने संगठन का बचाव किया और केरल उच्च न्यायालय को तर्क दिया कि यह सिमी से अलग एक सदस्य संगठन है, जो कुछ मुद्दों पर सरकार का विरोध करता है। अदालत ने सरकार के दावों को खारिज करते हुए इस प्रतिबंध को बरकरार रखा था। इतना ही नहीं, इस संगठन के पास से हथियार, बम, सीडी और कई ऐसे दस्तावेज केरल पुलिस को मिले थे जिसमें यह संगठन अल कायदा और तालिबान का समर्थन करता हुआ नजर आ रहा था।
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