बुधवार से शुरू हो रही फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की आभासी बैठक पाकिस्तान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ दिनों के दौरान, भारत सहित विश्व के कई देश लगातार इस बैठक पर नजर बनाए हुए है। इस बैठक में यह तय किया जाएगा कि पाकिस्तान अभी भी ग्रे लिस्ट में रहेगा या उससे बाहर आएगा।
इस बैठक में यह समीक्षा की जाएगी कि आतंकियों की फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने में पाकिस्तान कितना सफल रहा है। एफएटीएफ (FATF) की ये बैठक 23 अक्टूबर तक चलेगी।जून 2018 में, एफएटीएफ (FATF) ने पाकिस्तान को अपनी ग्रे सूची में शामिल किया। एफएटीएफ ने कथित तौर पर पाकिस्तान के लिए उन संगठनों के वित्तपोषण को जिम्मेदार ठहराया जो वैश्विक आतंकियों फैलाने में शामिल हैं।
एफएटीएफ से जुड़ी एजेंसी एशिया पैसिफिक ग्रुप (एपीजी) इस मामले में संबंधित देश की निगरानी करती है कि वह आतंकियों की फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को खत्म करने को लेकर कितना गंभीर है। वर्तमान में ग्रे सूची में 18 देश हैं।
पाकिस्तान 2013 से 2016 तक ग्रे सूची में रह चुका है
एक बार फिर पाकिस्तान एफएटीएफ द्वारा उठाए गए मुद्दों पर काम करने की कोशिश कर रहा है ताकि वह जल्द से जल्द इस सूची से बाहर आ सके।
हालाकि इससे पहले भी पाकिस्तान 2013 से 2016 तक ग्रे सूची में रह चुका है। बाद में आतंकियों पर कारवाई की रिपोर्ट के बाद पाकिस्तान को इस सूची से हटा दिया गया था।
संस्था का मुख्य उद्देश्य आतंकियों की फंडिंग रोकना
एफएटीएफ एक अंतरराष्ट्रीय निकाय है, जिसे 1989 में जी 7 देशों की पहल पर स्थापित किया गया था। संस्था का मुख्यालय पेरिस में है।इस संस्था का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में हो रही मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए नीतियां तैयार करना है।
हालांकि, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के बाद, आतंकियों की फंडिंग को रोकने का उद्देश्य भी शामिल था। ग्रे सूची में शामिल देश वे हैं जहां आतंकियों की फंडिंग और धन शोधन का जोखिम सबसे अधिक है, लेकिन वे इसे रोकने के लिए FATF के साथ काम करने के लिए तैयार हैं।

