एक के दो करने का मायाजाल: XPO, क्रिप्टो और नेटवर्किंग के नाम पर लूट का खेल

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आज के दौर में हर कोई रातों-रात अमीर बनना चाहता है। इसी 'शॉर्टकटकी तलाश का फायदा उठाकर कुछ कंपनियां और गिरोह लोगों को ठगने का नया जाल बुन रहे हैं। चाहे वो XPO होQnet हो या क्रिप्टो करेंसी के नाम पर चल रहे पोंजी स्कैम—इन सबका मकसद एक ही है: "आपकी जेब खाली और उनका खजाना भारी।"


आज के डिजिटल युग में जहाँ तकनीक ने जीवन आसान बनाया है, वहीं ठगों के लिए नए दरवाजे भी खोल दिए हैं। आपने अक्सर सुना होगा—"आज ₹10,000 लगाओ और अगले महीने ₹20,000 पाओ।" सुनने में यह सपना लगता है, लेकिन असल में यह एक गहरा दलदल है। XPO, Qnet, Tallwin Life और XADO जैसी कंपनियों ने हजारों लोगों के घर बर्बाद कर दिए हैं। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि ये 'नेटवर्किंग और पोंजी स्कीम्स' कैसे काम करती हैं और आप अपनी मेहनत की कमाई को कैसे बचा सकते हैं।


बाजार में हर दिन एक नया नाम आता है, लेकिन उनका काम करने का तरीका (Modus Operandi) एक जैसा ही होता है


 ठगी का नया चेहरा: XPO  

हाल ही में XPO (XPO Crypto/Investment) जैसे प्लेटफॉर्म्स ने सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए तहलका मचाया। इन कंपनियों का दावा होता है कि वे किसी बड़े इंटरनेशनल ग्रुप से जुड़ी हैं या उनके पास ऐसी "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)" तकनीक है जो क्रिप्टो मार्केट से आपको बिना कुछ किए पैसा कमा कर देगी।


XPO का पूरा मॉडल 'पोंजी स्कीम' पर आधारित था। इसमें पैसा कमाने के लेवल बनाए गए थे:

1.    डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट: खुद पैसे लगाओ और हर सप्ताह 8-12% प्रॉफिट' पाओ।

2.    रेफरल बोनस: अपने दोस्तों को जोड़ो और उनके निवेश का 10 % तक तुरंत अपने XPO वॉलेट में पाओ।


XPO ने जानबूझकर USDT  जैसी क्रिप्टो करेंसी का इस्तेमाल किया। इसके पीछे दो बड़े कारण थे:


  • ट्रैकिंग से बचना: बैंक ट्रांसफर के मुकाबले क्रिप्टो ट्रांजेक्शन को ट्रैक करना और पुलिस के लिए उसे फ्रीज करना बहुत मुश्किल होता है।

  • ग्लोबल इमेज: क्रिप्टो का नाम जुड़ते ही लोगों को लगता है कि यह कोई बहुत हाई-टेक और इंटरनेशनल प्रोजेक्ट है।

किसी भी बड़े स्कैम की तरह XPO का अंत भी बिल्कुल वैसा ही हुआ:

  • फेज 1: अचानक 'विड्रॉल' रुक गए।
  • फेज 2: ग्रुप्स में एडमिन्स ने कहना शुरू किया कि "सरकार, पुलिस ने पैसे ब्लॉक कर दिये।  
  • फेज 3: हज़ारों लोगों ने डर के मारे मन ही मन बात दबा कर बैठें रहे और मानसिक तनाव झेल रहे।
  • फेज 4: कुछ लोगों ने आगे आकर दावा किया की कंपनी के टॉप लोगों से उनकी बात हो रही है विड्राल 28 फरवरी तक मिल जाएगा।   


सिर्फ XPO अकेला नहीं है। बाजार में इसके जैसे कई और कंपिनियां सक्रिय हैं या होकर जा चुके हैं।


कैसे बचें इन 'डिजिटल डाकुओं' से?


अगर आप किसी भी ऐप में पैसा लगा रहे हैं, तो ये 3 बातें याद रखें:

1.    कोई ऑफिस नहीं, कोई भरोसा नहीं: अगर कंपनी का भारत में कोई रजिस्टर्ड ऑफिस या लीगल प्रतिनिधि नहीं है, तो वहाँ ₹1 भी न लगाएं।

2.    सिर्फ ऐप पर भरोसा न करें: प्ले स्टोर पर ऐप होने का मतलब यह नहीं है कि वह सुरक्षित है। कोई भी ₹5,000 देकर ऐप डाल सकता है।

3.    लालच की सीमा पहचानें: बैंक साल का 7% देता है। अगर कोई ऐप एक हफ्ते का 1-5% भी दे रहा है, तो वह आपको लूटने आया है।

 



Qnet जैसी कंपनियां भी सालों से "डायरेक्ट सेलिंग" के नाम पर विवादों में रही हैं। इनका तरीका थोड़ा अलग होता है—ये आपको महंगे प्रोडक्ट्स खरीदने को कहते हैं और फिर एक ऐसी चेन (Chain System) में फँसाते हैं जहाँ आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी उसी जाल में लाना पड़ता है। असल में, यहाँ उत्पाद बेचना गौण है, और नए लोगों को जोड़कर उनसे पैसे ऐंठना ही असली मकसद होता है।


कैसे फँसते हैं लोग? (इन्वेस्टमेंट का तरीका)

इन कंपनियों के काम करने का तरीका बहुत ही मनोवैज्ञानिक और सुनियोजित होता है:


  • भरोसे की शुरुआत: सबसे पहले आपको आपका कोई करीबी दोस्त या रिश्तेदार संपर्क करता है। वह आपको अपने "बढ़ते हुए बैंक बैलेंस" के स्क्रीनशॉट दिखाता है।

  • छोटा निवेश, बड़ा रिटर्न: शुरुआत में आपसे कहा जाता है कि सिर्फ 5,000 या 10,000 रुपये लगाओ।

  • लालच का तड़का: जैसे ही आप पैसे लगाते हैं, आपके मोबाइल ऐप या डैशबोर्ड पर वह पैसा बढ़ता हुआ दिखने लगता है। आपको शुरुआत में 200-500 रुपये का "प्रॉफिट" आपके बैंक खाते में वापस भी भेजा जाता है ताकि आपका भरोसा पक्का हो जाए।

  • अपग्रेड का दबाव: जब आपको भरोसा हो जाता है, तो आपसे कहा जाता है कि "अगर 10 हज़ार पर इतना मिला, तो 1 लाख लगाओगे तो करोड़पति बन जाओगे।" लोग अपना सोना गिरवी रखकर या लोन लेकर बड़ा निवेश कर देते हैं।

 निवेश से बचने और सतर्क रहने के तरीके

सच्चाई यह है कि मेहनत के बिना पैसा कहीं नहीं बढ़ता। इन स्कैम्स से बचने के लिए नीचे दिए गए पॉइंट्स को गांठ बांध लें:


  • अवास्तविक रिटर्न (Unrealistic Returns): अगर कोई कंपनी महीने का 20% या 30% रिटर्न देने का वादा कर रही है, तो समझ जाइये कि वह 100% फ्रॉड है। दुनिया का सबसे बड़ा निवेशक भी साल का 15-20% ही बमुश्किल कमा पाता है।

  • सेबी (SEBI) या आरबीआई (RBI) रजिस्ट्रेशन चेक करें: भारत में निवेश का काम करने वाली हर कंपनी को SEBI या RBI से अनुमति लेनी होती है। अगर कंपनी के पास ये लाइसेंस नहीं हैं, तो उन्हें एक रुपया भी न दें।

  • नेटवर्किंग और चेन सिस्टम से बचें: जिस काम में पैसा कमाने के लिए 'बंदे जोड़ना' पड़े, वह इन्वेस्टमेंट नहीं, बल्कि एक 'पिरामिड स्कीम' है जो अंत में ढहनी ही है।

  • सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर आँख बंद कर भरोसा न करें: कई बार बड़े यूट्यूबर्स या टेलीग्राम चैनल्स पैसे लेकर ऐसी फर्जी कंपनियों का प्रमोशन करते हैं।

 अगर निवेश करना ही है, तो कैसे करें?


पैसे से पैसा बनाना गलत नहीं है, लेकिन तरीका सही होना चाहिए:

1.    सरकारी योजनाएं: अगर सुरक्षा पहली प्राथमिकता है, तो PPF, या FD चुनें।


2.    म्युचुअल फंड्स (Mutual Funds): अगर आप मार्केट का फायदा लेना चाहते हैं, तो 'SIP' (Systematic Investment Plan) के जरिए इंडेक्स फंड्स में निवेश करें। यह रेगुलेटेड और सुरक्षित है।


3.    सीखकर स्टॉक मार्केट: किसी ऐप के कहने पर नहीं, बल्कि खुद रिसर्च करके अच्छी कंपनियों के शेयर्स खरीदें।


4.    कितना निवेश करें? एक नियम हमेशा याद रखें—उतना ही पैसा जोखिम में डालें जितना डूब जाने पर आपकी जिंदगी और परिवार पर असर न पड़े। कभी भी लोन लेकर निवेश न करें।



XPO और Qnet जैसे नाम बदलते रहेंगे, लेकिन ठगी का तरीका वही रहेगा। आपकी 'सतर्कता' ही इन चोरों की सबसे बड़ी हार है। याद रखिए, पैसा कमाने का कोई जादुई बटन नहीं होता। अगर कोई स्कीम "टू गुड टू बी ट्रू" (सच होने के लिहाज से बहुत अच्छी) लग रही है, तो यकीन मानिए वह सच नहीं है।


चेतावनी: अगर आप XPO या ऐसी किसी कंपनी के झांसे में आ गए हैं, तो शर्मिंदा होकर चुप न बैठें। तुरंत cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें, ऑनलाइन FIR या 1930 डायल करें। आपकी एक छोटी सी रिपोर्ट इन अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुँचा सकती है।

सुरक्षित रहें, शिक्षित रहें।

 


Tags: Travel, History

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